“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 16 – दैवासुरसम्पद्विभागयोग

दैवी और आसुरी संपदाओं के गुणों का विवेचन।

श्लोक 16.21

संस्कृत श्लोक

त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः |
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ||१६-२१||
trividhaṃ narakasyedaṃ dvāraṃ nāśanamātmanaḥ .
kāmaḥ krodhastathā lobhastasmādetattrayaṃ tyajet ||16-21||

हिंदी अर्थ

।।16.21।। काम, क्रोध और लोभ ये आत्मनाश के त्रिविध द्वार हैं, इसलिए इन तीनों को त्याग देना चाहिए।।

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