“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 1 – अर्जुनविषादयोग

कुरुक्षेत्र में अर्जुन के विषाद और धर्म-संकट का वर्णन।

श्लोक 1.20

संस्कृत श्लोक

अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः |
प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः |
हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते ||१-२०||
atha vyavasthitāndṛṣṭvā dhārtarāṣṭrān kapidhvajaḥ .
pravṛtte śastrasampāte dhanurudyamya pāṇḍavaḥ ||1-20||

हिंदी अर्थ

।।1.20।।हे महीपते ! इस प्रकार जब युद्ध प्रारम्भ होने वाला ही था कि कपिध्वज अर्जुन ने धृतराष्ट्र के पुत्रों को स्थित देखकर धनुष उठाकर भगवान् हृषीकेश से ये शब्द कहे।

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