“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 1 – अर्जुनविषादयोग

कुरुक्षेत्र में अर्जुन के विषाद और धर्म-संकट का वर्णन।

श्लोक 1.13

संस्कृत श्लोक

ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः |
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ||१-१३||
tataḥ śaṅkhāśca bheryaśca paṇavānakagomukhāḥ .
sahasaivābhyahanyanta sa śabdastumulo.abhavat ||1-13||

हिंदी अर्थ

।।1.13।।तत्पश्चात् शंख, नगारे, ढोल व शृंगी आदि वाद्य एक साथ ही बज उठे, जिनका बड़ा भयंकर शब्द हुआ।

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