“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 1 – अर्जुनविषादयोग

कुरुक्षेत्र में अर्जुन के विषाद और धर्म-संकट का वर्णन।

श्लोक 1.18

संस्कृत श्लोक

द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते |
सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् ||१-१८||
drupado draupadeyāśca sarvaśaḥ pṛthivīpate .
saubhadraśca mahābāhuḥ śaṅkhāndadhmuḥ pṛthakpṛthak ||1-18||

हिंदी अर्थ

।।1.18।।हे राजन् ! राजा द्रुपद,  द्रौपदी के पुत्र और महाबाहु सौभद्र (अभिमन्यु) इन सब ने अलग-अलग शंख बजाये।

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