“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 3 – कर्मयोग

निष्काम कर्म और कर्तव्यपालन का मार्ग।

श्लोक 3.39

संस्कृत श्लोक

आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा |
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च ||३-३९||
āvṛtaṃ jñānametena jñānino nityavairiṇā .
kāmarūpeṇa kaunteya duṣpūreṇānalena ca ||3-39||

हिंदी अर्थ

।।3.39।। हे कौन्तेय ! अग्नि के समान जिसको तृप्त करना कठिन है ऐसे कामरूप,  ज्ञानी के इस नित्य शत्रु द्वारा ज्ञान आवृत है।।

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