“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 3 – कर्मयोग

निष्काम कर्म और कर्तव्यपालन का मार्ग।

श्लोक 3.43

संस्कृत श्लोक

एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना |
जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ||३-४३||
evaṃ buddheḥ paraṃ buddhvā saṃstabhyātmānamātmanā .
jahi śatruṃ mahābāho kāmarūpaṃ durāsadam ||3-43||

हिंदी अर्थ

।।3.43।। इस प्रकार बुद्धि से परे (शुद्ध) आत्मा को जानकर आत्मा (बुद्धि) के द्वारा आत्मा (मन) को वश में करके, हे महाबाहो ! तुम इस दुर्जेय (दुरासदम्) कामरूप शत्रु को मारो।।

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