“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 15 – पुरुषोत्तमयोग

पुरुषोत्तम और संसाररूपी अश्वत्थ वृक्ष का ज्ञान।

श्लोक 15.19

संस्कृत श्लोक

यो मामेवमसम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम् |
स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत ||१५-१९||
yo māmevamasammūḍho jānāti puruṣottamam .
sa sarvavidbhajati māṃ sarvabhāvena bhārata ||15-19||

हिंदी अर्थ

।।15.19।। हे भारत ! इस प्रकार, जो, संमोहरहित, पुरुष मुझ पुरुषोत्तम को जानता है, वह सर्वज्ञ होकर सम्पूर्ण भाव से अर्थात् पूर्ण हृदय से मेरी भक्ति करता है।।

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