“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 15 – पुरुषोत्तमयोग

पुरुषोत्तम और संसाररूपी अश्वत्थ वृक्ष का ज्ञान।

श्लोक 15.20

संस्कृत श्लोक

इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ |
एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ||१५-२०||
iti guhyatamaṃ śāstramidamuktaṃ mayānagha .
etadbuddhvā buddhimānsyātkṛtakṛtyaśca bhārata ||15-20||

हिंदी अर्थ

।।15.20।। हे निष्पाप भारत ! इस प्रकार यह गुह्यतम शास्त्र मेरे द्वारा कहा गया, इसको जानकर मनुष्य बुद्धिमान और कृतकृत्य हो जाता है।।

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