अध्याय 1 – अर्जुनविषादयोग
कुरुक्षेत्र में अर्जुन के विषाद और धर्म-संकट का वर्णन।
श्लोक 1.33
संस्कृत श्लोक
येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च |
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ||१-३३||
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ||१-३३||
yeṣāmarthe kāṅkṣitaṃ no rājyaṃ bhogāḥ sukhāni ca .
ta ime.avasthitā yuddhe prāṇāṃstyaktvā dhanāni ca ||1-33||
ta ime.avasthitā yuddhe prāṇāṃstyaktvā dhanāni ca ||1-33||
हिंदी अर्थ
।।1.33।।हमें जिनके लिये राज्य, भोग और सुखादि की इच्छा है, वे ही लोग धन और जीवन की आशा को त्यागकर युद्ध में खड़े हैं।
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