“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 1 – अर्जुनविषादयोग

कुरुक्षेत्र में अर्जुन के विषाद और धर्म-संकट का वर्णन।

श्लोक 1.33

संस्कृत श्लोक

येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च |
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ||१-३३||
yeṣāmarthe kāṅkṣitaṃ no rājyaṃ bhogāḥ sukhāni ca .
ta ime.avasthitā yuddhe prāṇāṃstyaktvā dhanāni ca ||1-33||

हिंदी अर्थ

।।1.33।।हमें जिनके लिये राज्य,  भोग और सुखादि की इच्छा है,  वे ही लोग धन और जीवन की आशा को त्यागकर युद्ध में खड़े हैं।

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