अध्याय 12 – भक्तियोग
भक्ति के स्वरूप और श्रेष्ठ भक्त के गुण।
श्लोक 12.8
संस्कृत श्लोक
मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय |
निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ||१२-८||
निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ||१२-८||
mayyeva mana ādhatsva mayi buddhiṃ niveśaya .
nivasiṣyasi mayyeva ata ūrdhvaṃ na saṃśayaḥ ||12-8||
nivasiṣyasi mayyeva ata ūrdhvaṃ na saṃśayaḥ ||12-8||
हिंदी अर्थ
।।12.8।। तुम अपने मन और बुद्धि को मुझमें ही स्थिर करो, तदुपरान्त तुम मुझमें ही निवास करोगे, इसमें कोई संशय नहीं है।।
▶ वीडियो (YouTube)
इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 12.8 → YouTube Video URL
