अध्याय 13 – क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग
क्षेत्र, क्षेत्रज्ञ और प्रकृति-पुरुष का विवेचन।
श्लोक 13.21
संस्कृत श्लोक
कार्यकारणकर्तृत्वे हेतुः प्रकृतिरुच्यते |
पुरुषः सुखदुःखानां भोक्तृत्वे हेतुरुच्यते ||१३-२१||
पुरुषः सुखदुःखानां भोक्तृत्वे हेतुरुच्यते ||१३-२१||
kāryakāraṇakartṛtve hetuḥ prakṛtirucyate .
puruṣaḥ sukhaduḥkhānāṃ bhoktṛtve heturucyate ||13-21||
puruṣaḥ sukhaduḥkhānāṃ bhoktṛtve heturucyate ||13-21||
हिंदी अर्थ
।।13.21।। कार्य और कारण के उत्पन्न करने में हेतु प्रकृति कही जाती है और पुरुष सुख-दु:ख के भोक्तृत्व में हेतु कहा जाता है।।
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