अध्याय 13 – क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग
क्षेत्र, क्षेत्रज्ञ और प्रकृति-पुरुष का विवेचन।
श्लोक 13.9
संस्कृत श्लोक
इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहंकार एव च |
जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम् ||१३-९||
जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम् ||१३-९||
indriyārtheṣu vairāgyamanahaṃkāra eva ca .
janmamṛtyujarāvyādhiduḥkhadoṣānudarśanam ||13-9||
janmamṛtyujarāvyādhiduḥkhadoṣānudarśanam ||13-9||
हिंदी अर्थ
।।13.9।। इन्द्रियों के विषय के प्रति वैराग्य, अहंकार का अभाव, जन्म, मृत्यु, वृद्धवस्था, व्याधि और दुख में दोष दर्शन...৷৷.।।
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