अध्याय 13 – क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग
क्षेत्र, क्षेत्रज्ञ और प्रकृति-पुरुष का विवेचन।
श्लोक 13.34
संस्कृत श्लोक
यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः |
क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ||१३-३४||
क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ||१३-३४||
yathā prakāśayatyekaḥ kṛtsnaṃ lokamimaṃ raviḥ .
kṣetraṃ kṣetrī tathā kṛtsnaṃ prakāśayati bhārata ||13-34||
kṣetraṃ kṣetrī tathā kṛtsnaṃ prakāśayati bhārata ||13-34||
हिंदी अर्थ
।।13.34।। हे भारत ! जिस प्रकार एक ही सूर्य इस सम्पूर्ण लोक को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार एक ही क्षेत्री (क्षेत्रज्ञ) सम्पूर्ण क्षेत्र को प्रकाशित करता है।।
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