अध्याय 7 – ज्ञानविज्ञानयोग
ईश्वर के ज्ञान और अनुभूति का विस्तार।
श्लोक 7.2
संस्कृत श्लोक
ज्ञानं तेऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः |
यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते ||७-२||
यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते ||७-२||
jñānaṃ te.ahaṃ savijñānamidaṃ vakṣyāmyaśeṣataḥ .
yajjñātvā neha bhūyo.anyajjñātavyamavaśiṣyate ||7-2||
yajjñātvā neha bhūyo.anyajjñātavyamavaśiṣyate ||7-2||
हिंदी अर्थ
।।7.2।। मैं तुम्हारे लिए विज्ञान सहित इस ज्ञान को अशेष रूप से कहूँगा जिसको जानकर यहाँ (जगत् में) फिर और कुछ जानने योग्य (ज्ञातव्य) शेष नहीं रह जाता है।।
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