“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
Home›Chapters›Chapter 11›Shloka 15

अध्याय 11 – विश्वरूपदर्शनयोग

भगवान के विराट विश्वरूप का दर्शन।

श्लोक 11.15

संस्कृत श्लोक

अर्जुन उवाच |
पश्यामि देवांस्तव देव देहे
सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान् |
ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थ-
मृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान् ||११-१५||
arjuna uvāca .
paśyāmi devāṃstava deva dehe sarvāṃstathā bhūtaviśeṣasaṅghān .
brahmāṇamīśaṃ kamalāsanasthaṃ ṛṣīṃśca sarvānuragāṃśca divyān ||11-15||

हिंदी अर्थ

।।11.15।। अर्जुन ने कहा -- हे देव! मैं आपके शरीर में समस्त देवों को तथा अनेक भूतविशेषों के समुदायों को और कमलासन पर स्थित सृष्टि के स्वामी ब्रह्माजी को, ऋषियों को और दिव्य सर्पों को देख रहा हूँ।।

▶ वीडियो (YouTube)

इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 11.15 → YouTube Video URL