अध्याय 11 – विश्वरूपदर्शनयोग
भगवान के विराट विश्वरूप का दर्शन।
श्लोक 11.9
संस्कृत श्लोक
सञ्जय उवाच |
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः |
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ||११-९||
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः |
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ||११-९||
sañjaya uvāca .
evamuktvā tato rājanmahāyogeśvaro hariḥ .
darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram ||11-9||
evamuktvā tato rājanmahāyogeśvaro hariḥ .
darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram ||11-9||
हिंदी अर्थ
।।11.9।। संजय ने कहा -- हे राजन् ! महायोगेश्वर हरि ने इस प्रकार कहकर फिर अर्जुन के लिए परम ऐश्वर्ययुक्त रूप को दर्शाया।।
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