“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 13 – क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग

क्षेत्र, क्षेत्रज्ञ और प्रकृति-पुरुष का विवेचन।

श्लोक 13.28

संस्कृत श्लोक

समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम् |
विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति ||१३-२८||
samaṃ sarveṣu bhūteṣu tiṣṭhantaṃ parameśvaram .
vinaśyatsvavinaśyantaṃ yaḥ paśyati sa paśyati ||13-28||

हिंदी अर्थ

।।13.28।। जो पुरुष समस्त नश्वर भूतों में अनश्वर परमेश्वर को समभाव से स्थित देखता है, वही (वास्तव में) देखता है।।

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