“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 8 – अक्षरब्रह्मयोग

अक्षर ब्रह्म और अंतिम स्मरण की महिमा।

श्लोक 8.1

संस्कृत श्लोक

अर्जुन उवाच |
किं तद् ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम |
अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ||८-१||
arjuna uvāca .
kiṃ tad brahma kimadhyātmaṃ kiṃ karma puruṣottama .
adhibhūtaṃ ca kiṃ proktamadhidaivaṃ kimucyate ||8-1||

हिंदी अर्थ

।।8.1।। अर्जुन ने कहा -हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है अध्यात्म क्या है? तथा कर्म क्या है? और अधिभूत नाम से क्या कहा गया है? तथा अधिदैव नाम से क्या कहा जाता है,

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