“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 8 – अक्षरब्रह्मयोग

अक्षर ब्रह्म और अंतिम स्मरण की महिमा।

श्लोक 8.26

संस्कृत श्लोक

शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते |
एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुनः ||८-२६||
śuklakṛṣṇe gatī hyete jagataḥ śāśvate mate .
ekayā yātyanāvṛttimanyayāvartate punaḥ ||8-26||

हिंदी अर्थ

।।8.26।। जगत् के ये दो प्रकार के शुक्ल और कृष्ण मार्ग सनातन माने गये हैं । इनमें एक (शुक्ल) के द्वारा (साधक) अपुनरावृत्ति को तथा अन्य (कृष्ण) के द्वारा पुनरावृत्ति को प्राप्त होता है।।

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