“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग

राजविद्या और परम रहस्य स्वरूप भक्ति का ज्ञान।

श्लोक 9.7

संस्कृत श्लोक

सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् |
कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् ||९-७||
sarvabhūtāni kaunteya prakṛtiṃ yānti māmikām .
kalpakṣaye punastāni kalpādau visṛjāmyaham ||9-7||

हिंदी अर्थ

।।9.7।। हे कौन्तेय ! (एक) कल्प के अन्त में समस्त भूत मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं; और (दूसरे) कल्प के प्रारम्भ में उनको मैं फिर रचता हूँ।।

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