“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
Home›Chapters›Chapter 9›Shloka 12

अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग

राजविद्या और परम रहस्य स्वरूप भक्ति का ज्ञान।

श्लोक 9.12

संस्कृत श्लोक

मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः |
राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः ||९-१२||
moghāśā moghakarmāṇo moghajñānā vicetasaḥ .
rākṣasīmāsurīṃ caiva prakṛtiṃ mohinīṃ śritāḥ ||9-12||

हिंदी अर्थ

।।9.12।। वृथा आशा, वृथा कर्म और वृथा ज्ञान वाले अविचारीजन राक्षसों के और असुरों के मोहित करने वाले स्वभाव को धारण किये रहते हैं।।

▶ वीडियो (YouTube)

इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 9.12 → YouTube Video URL