अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग
राजविद्या और परम रहस्य स्वरूप भक्ति का ज्ञान।
श्लोक 9.3
संस्कृत श्लोक
अश्रद्दधानाः पुरुषा धर्मस्यास्य परन्तप |
अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ||९-३||
अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ||९-३||
aśraddadhānāḥ puruṣā dharmasyāsya parantapa .
aprāpya māṃ nivartante mṛtyusaṃsāravartmani ||9-3||
aprāpya māṃ nivartante mṛtyusaṃsāravartmani ||9-3||
हिंदी अर्थ
।।9.3।। हे परन्तप ! इस धर्म में श्रद्धारहित पुरुष मुझे प्राप्त न होकर मृत्युरूपी संसार में रहते हैं (भ्रमण करते हैं)।।
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