अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग
राजविद्या और परम रहस्य स्वरूप भक्ति का ज्ञान।
श्लोक 9.29
संस्कृत श्लोक
समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः |
ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम् ||९-२९||
ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम् ||९-२९||
samo.ahaṃ sarvabhūteṣu na me dveṣyo.asti na priyaḥ .
ye bhajanti tu māṃ bhaktyā mayi te teṣu cāpyaham ||9-29||
ye bhajanti tu māṃ bhaktyā mayi te teṣu cāpyaham ||9-29||
हिंदी अर्थ
।।9.29।। मैं समस्त भूतों में सम हूँ; न कोई मुझे अप्रिय है और न प्रिय; परन्तु जो मुझे भक्तिपूर्वक भजते हैं, वे मुझमें और मैं भी उनमें हूँ।।
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