अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग
राजविद्या और परम रहस्य स्वरूप भक्ति का ज्ञान।
श्लोक 9.11
संस्कृत श्लोक
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम् |
परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम् ||९-११||
परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम् ||९-११||
avajānanti māṃ mūḍhā mānuṣīṃ tanumāśritam .
paraṃ bhāvamajānanto mama bhūtamaheśvaram ||9-11||
paraṃ bhāvamajānanto mama bhūtamaheśvaram ||9-11||
हिंदी अर्थ
।।9.11।। समस्त भूतों के महान् ईश्वर रूप मेरे परम भाव को नहीं जानते हुए मूढ़ लोग मनुष्य शरीरधारी मुझ परमात्मा का अनादर करते हैं।।
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