“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग

राजविद्या और परम रहस्य स्वरूप भक्ति का ज्ञान।

श्लोक 9.28

संस्कृत श्लोक

शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः |
संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ||९-२८||
śubhāśubhaphalairevaṃ mokṣyase karmabandhanaiḥ .
saṃnyāsayogayuktātmā vimukto māmupaiṣyasi ||9-28||

हिंदी अर्थ

।।9.28।। इस प्रकार तुम शुभाशुभ फलस्वरूप कर्मबन्धनों से मुक्त हो जाओगे; और संन्यासयोग से युक्तचित्त हुए तुम विमुक्त होकर मुझे ही प्राप्त हो जाओगे।।

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