अध्याय 14 – गुणत्रयविभागयोग
सत्त्व, रज और तम—तीनों गुणों का विश्लेषण।
श्लोक 14.5
संस्कृत श्लोक
सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः |
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ||१४-५||
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ||१४-५||
sattvaṃ rajastama iti guṇāḥ prakṛtisambhavāḥ .
nibadhnanti mahābāho dehe dehinamavyayam ||14-5||
nibadhnanti mahābāho dehe dehinamavyayam ||14-5||
हिंदी अर्थ
।।14.5।। हे महाबाहो ! सत्त्व, रज और तम ये प्रकृति से उत्पन्न तीनों गुण देही आत्मा को देह के साथ बांध देते हैं।।
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