“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 14 – गुणत्रयविभागयोग

सत्त्व, रज और तम—तीनों गुणों का विश्लेषण।

श्लोक 14.21

संस्कृत श्लोक

अर्जुन उवाच |
कैर्लिङ्गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो |
किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ||१४-२१||
arjuna uvāca .
kairliṅgaistrīnguṇānetānatīto bhavati prabho .
kimācāraḥ kathaṃ caitāṃstrīnguṇānativartate ||14-21||

हिंदी अर्थ

।।14.21।। अर्जुन ने कहा -- हे प्रभो ! इन तीनो गुणों से अतीत हुआ पुरुष किन लक्षणों से युक्त होता है ? वह किस प्रकार के आचरण वाला होता है ? और, वह किस उपाय से इन तीनों गुणों से अतीत होता है।।

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