“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 14 – गुणत्रयविभागयोग

सत्त्व, रज और तम—तीनों गुणों का विश्लेषण।

श्लोक 14.13

संस्कृत श्लोक

अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च |
तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ||१४-१३||
aprakāśo.apravṛttiśca pramādo moha eva ca .
tamasyetāni jāyante vivṛddhe kurunandana ||14-13||

हिंदी अर्थ

।।14.13।। हे कुरुनन्दन ! तमोगुण के प्रवृद्ध होने पर अप्रकाश, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह ये सब उत्पन्न होते हैं।।

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