“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 14 – गुणत्रयविभागयोग

सत्त्व, रज और तम—तीनों गुणों का विश्लेषण।

श्लोक 14.9

संस्कृत श्लोक

सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत |
ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे सञ्जयत्युत ||१४-९||
sattvaṃ sukhe sañjayati rajaḥ karmaṇi bhārata .
jñānamāvṛtya tu tamaḥ pramāde sañjayatyuta ||14-9||

हिंदी अर्थ

।।14.9।। हे भारत ! सत्त्वगुण सुख में आसक्त कर देता है और रजोगुण कर्म में, किन्तु तमोगुण ज्ञान को आवृत्त करके जीव को प्रमाद से युक्त कर देता है।।

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