अध्याय 14 – गुणत्रयविभागयोग
सत्त्व, रज और तम—तीनों गुणों का विश्लेषण।
श्लोक 14.14
संस्कृत श्लोक
यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् |
तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ||१४-१४||
तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ||१४-१४||
yadā sattve pravṛddhe tu pralayaṃ yāti dehabhṛt .
tadottamavidāṃ lokānamalānpratipadyate ||14-14||
tadottamavidāṃ lokānamalānpratipadyate ||14-14||
हिंदी अर्थ
।।14.14।। जब यह जीव (देहभृत्) सत्त्वगुण की प्रवृद्धि में मृत्यु को प्राप्त होता है, तब उत्तम कर्म करने वालों के निर्मल अर्थात् स्वर्गादि लोकों को प्राप्त होता है।।
▶ वीडियो (YouTube)
इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 14.14 → YouTube Video URL
