“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 8 – अक्षरब्रह्मयोग

अक्षर ब्रह्म और अंतिम स्मरण की महिमा।

श्लोक 8.16

संस्कृत श्लोक

आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन |
मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ||८-१६||
ābrahmabhuvanāllokāḥ punarāvartino.arjuna .
māmupetya tu kaunteya punarjanma na vidyate ||8-16||

हिंदी अर्थ

।।8.16।। हे अर्जुन ! ब्रह्म लोक तक के सब लोग पुनरावर्ती स्वभाव वाले हैं। परन्तु, हे कौन्तेय ! मुझे प्राप्त होने पर पुनर्जन्म नहीं होता।।

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