“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 14 – गुणत्रयविभागयोग

सत्त्व, रज और तम—तीनों गुणों का विश्लेषण।

श्लोक 14.11

संस्कृत श्लोक

सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते |
ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ||१४-११||
sarvadvāreṣu dehe.asminprakāśa upajāyate .
jñānaṃ yadā tadā vidyādvivṛddhaṃ sattvamityuta ||14-11||

हिंदी अर्थ

।।14.11।। जब इस देह के द्वारों अर्थात् समस्त इन्द्रियों में ज्ञानरूप प्रकाश उत्पन्न होता है, तब सत्त्वगुण को प्रवृद्ध हुआ जानो।।

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