“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 14 – गुणत्रयविभागयोग

सत्त्व, रज और तम—तीनों गुणों का विश्लेषण।

श्लोक 14.3

संस्कृत श्लोक

मम योनिर्महद् ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् |
सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ||१४-३||
mama yonirmahad brahma tasmingarbhaṃ dadhāmyaham .
sambhavaḥ sarvabhūtānāṃ tato bhavati bhārata ||14-3||

हिंदी अर्थ

।।14.3।। हे भारत ! मेरी महद् ब्रह्मरूप प्रकृति, (भूतों की) योनि है, जिसमें मैं गर्भाधान करता हूँ; इससे समस्त भूतों की उत्पत्ति होती है।।

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