अध्याय 5 – कर्मसंन्यासयोग
कर्मयोग और संन्यास के समन्वय का विवेचन।
श्लोक 5.15
संस्कृत श्लोक
नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभुः |
अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः ||५-१५||
अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः ||५-१५||
nādatte kasyacitpāpaṃ na caiva sukṛtaṃ vibhuḥ .
ajñānenāvṛtaṃ jñānaṃ tena muhyanti jantavaḥ ||5-15||
ajñānenāvṛtaṃ jñānaṃ tena muhyanti jantavaḥ ||5-15||
हिंदी अर्थ
।।5.15।। विभु परमात्मा न किसी के पापकर्म को और न पुण्यकर्म को ही ग्रहण करता है; (किन्तु) अज्ञान से ज्ञान ढका हुआ है, इससे सब जीव मोहित होते हैं।।
▶ वीडियो (YouTube)
इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 5.15 → YouTube Video URL
