“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
Home›Chapters›Chapter 5›Shloka 24

अध्याय 5 – कर्मसंन्यासयोग

कर्मयोग और संन्यास के समन्वय का विवेचन।

श्लोक 5.24

संस्कृत श्लोक

योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः |
स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ||५-२४||
yo.antaḥsukho.antarārāmastathāntarjyotireva yaḥ .
sa yogī brahmanirvāṇaṃ brahmabhūto.adhigacchati ||5-24||

हिंदी अर्थ

।।5.24।। जो पुरुष अन्तरात्मा में ही सुख वाला,  आत्मा में ही आराम वाला तथा आत्मा में ही ज्ञान वाला है,  वह योगी ब्रह्मरूप बनकर ब्रह्मनिर्वाण अर्थात् परम मोक्ष को प्राप्त होता है।।

▶ वीडियो (YouTube)

इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 5.24 → YouTube Video URL