“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 5 – कर्मसंन्यासयोग

कर्मयोग और संन्यास के समन्वय का विवेचन।

श्लोक 5.26

संस्कृत श्लोक

कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् |
अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ||५-२६||
kāmakrodhaviyuktānāṃ yatīnāṃ yatacetasām .
abhito brahmanirvāṇaṃ vartate viditātmanām ||5-26||

हिंदी अर्थ

।।5.26।। काम और क्रोध से रहित,  संयतचित्त वाले तथा आत्मा को जानने वाले यतियों के लिए सब ओर मोक्ष (या ब्रह्मानन्द) विद्यमान रहता है।।

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