“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग

राजविद्या और परम रहस्य स्वरूप भक्ति का ज्ञान।

श्लोक 9.17

संस्कृत श्लोक

पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः |
वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक्साम यजुरेव च ||९-१७||
pitāhamasya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ .
vedyaṃ pavitramoṃkāra ṛksāma yajureva ca ||9-17||

हिंदी अर्थ

।।9.17।। मैं ही इस जगत् का पिता, माता, धाता (धारण करने वाला) और पितामह हूँमैं वेद्य (जानने योग्य) वस्तु हूँ, पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ।।

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