“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 6 – ध्यानयोग

मन के नियंत्रण और ध्यानयोग की साधना।

श्लोक 6.16

संस्कृत श्लोक

नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः |
न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ||६-१६||
nātyaśnatastu yogo.asti na caikāntamanaśnataḥ .
na cātisvapnaśīlasya jāgrato naiva cārjuna ||6-16||

हिंदी अर्थ

।।6.16।। परन्तु, हे अर्जुन ! यह योग उस पुरुष के लिए सम्भव नहीं होता, जो अधिक खाने वाला है या बिल्कुल न खाने वाला है तथा जो अधिक सोने वाला है या सदा जागने वाला है।।

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