अध्याय 6 – ध्यानयोग
मन के नियंत्रण और ध्यानयोग की साधना।
श्लोक 6.4
संस्कृत श्लोक
यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते |
सर्वसङ्कल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ||६-४||
सर्वसङ्कल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ||६-४||
yadā hi nendriyārtheṣu na karmasvanuṣajjate .
sarvasaṅkalpasaṃnyāsī yogārūḍhastadocyate ||6-4||
sarvasaṅkalpasaṃnyāsī yogārūḍhastadocyate ||6-4||
हिंदी अर्थ
।।6.4।। जब (साधक) न इन्द्रियों के विषयों में और न कर्मों में आसक्त होता है तब सर्व संकल्पों के संन्यासी को योगारूढ़ कहा जाता है।।
▶ वीडियो (YouTube)
इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 6.4 → YouTube Video URL
