अध्याय 6 – ध्यानयोग
मन के नियंत्रण और ध्यानयोग की साधना।
श्लोक 6.34
संस्कृत श्लोक
चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद् दृढम् |
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ||६-३४||
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ||६-३४||
cañcalaṃ hi manaḥ kṛṣṇa pramāthi balavad dṛḍham .
tasyāhaṃ nigrahaṃ manye vāyoriva suduṣkaram ||6-34||
tasyāhaṃ nigrahaṃ manye vāyoriva suduṣkaram ||6-34||
हिंदी अर्थ
।।6.34।। क्योंकि हे कृष्ण ! यह मन चंचल और प्रमथन स्वभाव का तथा बलवान् और दृढ़ है; उसका निग्रह करना मैं वायु के समान अति दुष्कर मानता हूँ ।।
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