अध्याय 6 – ध्यानयोग
मन के नियंत्रण और ध्यानयोग की साधना।
श्लोक 6.36
संस्कृत श्लोक
असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः |
वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायतः ||६-३६||
वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायतः ||६-३६||
asaṃyatātmanā yogo duṣprāpa iti me matiḥ .
vaśyātmanā tu yatatā śakyo.avāptumupāyataḥ ||6-36||
vaśyātmanā tu yatatā śakyo.avāptumupāyataḥ ||6-36||
हिंदी अर्थ
।।6.36।। असंयत मन के पुरुष द्वारा योग प्राप्त होना कठिन है, परन्तु स्वाधीन मन वाले प्रयत्नशील पुरुष द्वारा उपाय से योग प्राप्त होना संभव है, यह मेरा मत है।।
▶ वीडियो (YouTube)
इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 6.36 → YouTube Video URL
