अध्याय 2 – सांख्ययोग
आत्मा का स्वरूप, कर्म, ज्ञान और समत्व की मूल शिक्षाएँ।
श्लोक 2.1
संस्कृत श्लोक
सञ्जय उवाच |
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् |
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ||२-१||
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् |
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ||२-१||
sañjaya uvāca .
taṃ tathā kṛpayāviṣṭamaśrupūrṇākulekṣaṇam .
viṣīdantamidaṃ vākyamuvāca madhusūdanaḥ ||2-1||
taṃ tathā kṛpayāviṣṭamaśrupūrṇākulekṣaṇam .
viṣīdantamidaṃ vākyamuvāca madhusūdanaḥ ||2-1||
हिंदी अर्थ
।।2.1।। संजय ने कहा -- इस प्रकार करुणा और विषाद से अभिभूत, अश्रुपूरित नेत्रों वाले आकुल अर्जुन से मधुसूदन ने यह वाक्य कहा।।
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