“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 2 – सांख्ययोग

आत्मा का स्वरूप, कर्म, ज्ञान और समत्व की मूल शिक्षाएँ।

श्लोक 2.6

संस्कृत श्लोक

न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो
यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः |
यानेव हत्वा न जिजीविषामस्-
तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ||२-६||
na caitadvidmaḥ kataranno garīyo yadvā jayema yadi vā no jayeyuḥ .
yāneva hatvā na jijīviṣāmaḥ te.avasthitāḥ pramukhe dhārtarāṣṭrāḥ ||2-6||

हिंदी अर्थ

।।2.6।। हम नहीं जानते कि हमें क्या करना उचित है। हम यह भी नहीं जानते कि हम जीतेंगे, या वे हमको जीतेंगे, जिनको मारकर हम जीवित नहीं रहना चाहते वे ही धृतराष्ट्र के पुत्र हमारे सामने युद्ध के लिए खड़े हैं।।

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