अध्याय 2 – सांख्ययोग
आत्मा का स्वरूप, कर्म, ज्ञान और समत्व की मूल शिक्षाएँ।
श्लोक 2.35
संस्कृत श्लोक
भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः |
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ||२-३५||
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ||२-३५||
bhayādraṇāduparataṃ maṃsyante tvāṃ mahārathāḥ .
yeṣāṃ ca tvaṃ bahumato bhūtvā yāsyasi lāghavam ||2-35||
yeṣāṃ ca tvaṃ bahumato bhūtvā yāsyasi lāghavam ||2-35||
हिंदी अर्थ
।।2.35।। और जिनके लिए तुम बहुत माननीय हो उनके लिए अब तुम तुच्छता को प्राप्त होओगे, वे महारथी लोग तुम्हें भय के कारण युद्ध से निवृत्त हुआ मानेंगे।।
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