अध्याय 2 – सांख्ययोग
आत्मा का स्वरूप, कर्म, ज्ञान और समत्व की मूल शिक्षाएँ।
श्लोक 2.3
संस्कृत श्लोक
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते |
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ||२-३||
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ||२-३||
klaibyaṃ mā sma gamaḥ pārtha naitattvayyupapadyate .
kṣudraṃ hṛdayadaurbalyaṃ tyaktvottiṣṭha parantapa ||2-3||
kṣudraṃ hṛdayadaurbalyaṃ tyaktvottiṣṭha parantapa ||2-3||
हिंदी अर्थ
।।2.3।। हे पार्थ क्लीव (कायर) मत बनो। यह तुम्हारे लिये अशोभनीय है, हे ! परंतप हृदय की क्षुद्र दुर्बलता को त्यागकर खड़े हो जाओ।।
▶ वीडियो (YouTube)
इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 2.3 → YouTube Video URL
