अध्याय 2 – सांख्ययोग
आत्मा का स्वरूप, कर्म, ज्ञान और समत्व की मूल शिक्षाएँ।
श्लोक 2.71
संस्कृत श्लोक
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः |
निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ||२-७१||
निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ||२-७१||
vihāya kāmānyaḥ sarvānpumāṃścarati niḥspṛhaḥ .
nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntimadhigacchati ||2-71||
nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntimadhigacchati ||2-71||
हिंदी अर्थ
।।2.71।। जो पुरुष सब कामनाओं को त्यागकर स्पृहारहित? ममभाव रहित और निरहंकार हुआ विचरण करता है? वह शान्ति प्राप्त करता है।।
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