अध्याय 2 – सांख्ययोग
आत्मा का स्वरूप, कर्म, ज्ञान और समत्व की मूल शिक्षाएँ।
श्लोक 2.72
संस्कृत श्लोक
एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति |
स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ||२-७२||
स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ||२-७२||
eṣā brāhmī sthitiḥ pārtha naināṃ prāpya vimuhyati .
sthitvāsyāmantakāle.api brahmanirvāṇamṛcchati ||2-72||
sthitvāsyāmantakāle.api brahmanirvāṇamṛcchati ||2-72||
हिंदी अर्थ
।।2.72।। हे पार्थ यह ब्राह्मी स्थिति है। इसे प्राप्त कर पुरुष मोहित नहीं होता। अन्तकाल में भी इस निष्ठा में स्थित होकर ब्रह्मनिर्वाण (ब्रह्म के साथ एकत्व) को प्राप्त होता है।।
▶ वीडियो (YouTube)
इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 2.72 → YouTube Video URL
