अध्याय 2 – सांख्ययोग
आत्मा का स्वरूप, कर्म, ज्ञान और समत्व की मूल शिक्षाएँ।
श्लोक 2.38
संस्कृत श्लोक
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ |
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ||२-३८||
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ||२-३८||
sukhaduḥkhe same kṛtvā lābhālābhau jayājayau .
tato yuddhāya yujyasva naivaṃ pāpamavāpsyasi ||2-38||
tato yuddhāya yujyasva naivaṃ pāpamavāpsyasi ||2-38||
हिंदी अर्थ
।।2.38।। सुख-दु:ख, लाभ-हानि और जय-पराजय को समान करके युद्ध के लिये तैयार हो जाओ; इस प्रकार तुमको पाप नहीं होगा।।
▶ वीडियो (YouTube)
इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 2.38 → YouTube Video URL
