अध्याय 2 – सांख्ययोग
आत्मा का स्वरूप, कर्म, ज्ञान और समत्व की मूल शिक्षाएँ।
श्लोक 2.63
संस्कृत श्लोक
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः |
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ||२-६३||
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ||२-६३||
krodhādbhavati sammohaḥ sammohātsmṛtivibhramaḥ .
smṛtibhraṃśād buddhināśo buddhināśātpraṇaśyati ||2-63||
smṛtibhraṃśād buddhināśo buddhināśātpraṇaśyati ||2-63||
हिंदी अर्थ
।।2.63।। क्रोध से उत्पन्न होता है मोह और मोह से स्मृति विभ्रम। स्मृति के भ्रमित होने पर बुद्धि का नाश होता है और बुद्धि के नाश होने से वह मनुष्य नष्ट हो जाता है।।
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