“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.4

संस्कृत श्लोक

बुद्धिर्ज्ञानमसम्मोहः क्षमा सत्यं दमः शमः |
सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च ||१०-४||
buddhirjñānamasammohaḥ kṣamā satyaṃ damaḥ śamaḥ .
sukhaṃ duḥkhaṃ bhavo.abhāvo bhayaṃ cābhayameva ca ||10-4||

हिंदी अर्थ

।।10.4।। बुद्धि, ज्ञान, मोह का अभाव, क्षमा, सत्य, दम (इन्द्रिय संयम), शम (मन: संयम), सुख, दु:ख, जन्म और मृत्यु, भय और अभय।।

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